under production linked incentive scheme mobile phones worth 11.5 lakh crore rupees will be produced। PLI Scheme के तहत होगा 11.5 लाख करोड़ रुपये के मोबाइल फोन का उत्पादन

 

कोरोना महामारी के संकट में जहां विश्व की अर्थव्यवस्था हिचकोले ले रही है, वहीं भारत विदेशी निवेशकों के लिए सबसे आकर्षक देश बनकर उभरा है. आने वाले पांच सालों में लगभग 22 कंपनियां भारत में 11.5 लाख करोड़ रुपये का मोबाइल फोन और कॉम्पोनेंट का उत्पादन करेंगी. केंद्र सरकार ने प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव की योजना शुरू की है, जिससे देश में 12 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार मिलेगा.

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मोबाइल कंपनियों की यूनिट को भारत बुलाने को लेकर मीडिया से प्रेस कांफ्रेस की है. इस दौरान उन्होंने कहा हमारी कोशिश थी कि हम विश्व में फोन बनाने वालीं महत्वपूर्ण यूनिट को भारत बुलाएं और भारत की मोबाइल कंपनियों को भी आगे बढ़ने का अवसर दें. इसलिए हम ‘प्रोडक्शन लिंक इंसेंटिव प्रोग्राम’ लेकर आए है.

जिसमें हम वैश्विक और भारतीय कंपनियों को 5 साल के लिए इंसेंटिव देंगे. इस स्कीम में 31 जुलाई तक जो आवेदन मांगे थे उसमें 22 कंपनियों के आवेदन आए हैं. सब कंपनियों ने बताया है कि वो आने वाले 5 सालों में 11.5 लाख करोड़ का मोबाइल फोन और कॉम्पोनेंट बनाएंगे.  प्रसाद ने कहा कि हमारी कोशिश थी कि हम विश्व में फोन बनाने वालीं महत्वपूर्ण यूनिट को भारत बुलाएं और भारत की मोबाइल कंपनियों को भी आगे बढ़ने का अवसर दें. इसलिए हम ‘प्रोडक्शन लिंक इंसेंटिव प्रोग्राम’ लेकर आए हैं जिसमें हम वैश्विक और भारतीय कंपनियों को 5 साल के लिए इंसेंटिव देंगे.

अगले 5 सालों में वो उत्पादन का 60 प्रतिशत निर्यात करेंगे, मतलब 7 लाख करोड़ के मोबाइल और कॉम्पोनेंट निर्यात करेंगे. अगले 5 साल में वो 3 लाख भारतीयों को सीधे और करीब 9 लाख भारतीयों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार देंगे.

रविशंकर प्रसाद ने कहा, “आज हम इतिहास बनाने जा रहे हैं. जब हम आत्मनिर्भर भारत की बात करते हैं तो अलगाववादी भारत की बात नहीं करते हैं. हमें अपनी क्षमता को बढ़ाना है. भारत की अर्थव्यवस्था से दुनिया की अर्थव्यवस्था बनाएं. मेक इन इंडिया सिर्फ भारत के लिए है, लेकिन किसी देश के खिलाफ नहीं है.” प्रसाद ने कहा कि केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण, खासतौर से मोबाइल निर्माण तेजी से बढ़ा है. जब सत्ता में आए थे तब दो फैक्ट्री थीं, अब 200 हैं.

आपको बता दें कि इस वक्त पूरा विश्व कोरोना संकट के बुरे दौर से गुजर रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में कोरोना संकट के इस दौर भी भारत वैश्विक निवेशकों के लिए सबसे पसंदीदा देश के रूप में उभरा है. अप्रैल से जुलाई महीने के दौरान वैश्विक निवेशकों ने भारत में भारी निवेश किया है. पिछले चार महीनों में इन वैश्विक कंपनियों ने भारत में निवेश किया है.

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